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ॐ जय जगदीश हरे | Om Jai Jagdish Hare Flute , Part 1I Om Jai Jagdish

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प्यार एक अजीब सा एहसास है / Love is a strange feeling.

 प्यार एक अजीब सा एहसास है।  जिसको सब समझ नही सकते ।  केवल उसी को समझ में आता है जिसको प्यार होता है ।  कोई इस एहसास को बता भी नही सकता ।  इसको केवल महसूस किया जा सकता है ।  यह आपके जीवन में कई बदलाव ला सकता है।

🌸 नवरात्रि के प्रथम दिन का महत्व – माँ शैलपुत्री की आराधना

🌸 नवरात्रि के प्रथम दिन का महत्व – माँ शैलपुत्री की आराधना नवरात्रि भारत के प्रमुख हिन्दू पर्वों में से एक है, जो माँ दुर्गा के नौ रूपों की उपासना का प्रतीक है। शारदीय नवरात्रि का आरम्भ प्रतिपदा (प्रथम दिन) से होता है। इस दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाती है। 🌼 माँ शैलपुत्री का स्वरूप नाम का अर्थ : शैल (पर्वत) + पुत्री (बेटी) अर्थात् पर्वतराज हिमालय की पुत्री। माँ शैलपुत्री का वाहन नंदी बैल है। उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल पुष्प सुशोभित है। माँ का यह रूप साधना की शुरुआत, स्थिरता और शुद्धता का प्रतीक है। 🙏 क्यों मनाया जाता है नवरात्रि? असुरों पर देवी की विजय : महिषासुर नामक राक्षस का संहार करने हेतु माँ दुर्गा ने नौ रातों तक युद्ध किया और दसवें दिन विजय प्राप्त की। आध्यात्मिक शुद्धि : नवरात्रि आत्म-शक्ति को जागृत करने, साधना, उपवास और आत्मसंयम का पर्व है। ऋतु परिवर्तन का उत्सव : यह समय वर्षा ऋतु से शरद ऋतु में प्रवेश का है, जब शरीर व मन को नई ऊर्जा की आवश्यकता होती है। 🕉️ पूजा विधि (प्रथम दिन) ...

🌸 नवरात्रि के छठे दिन का महत्व – माँ कात्यायनी की आराधना

 यहाँ नवरात्रि के छठे दिन (षष्ठी) के लिए संपूर्ण हिन्दी ब्लॉग सामग्री प्रस्तुत है। इसे आप अपने ब्लॉग, सोशल मीडिया पोस्ट या वीडियो स्क्रिप्ट में सीधे उपयोग कर सकते हैं: 🌸 नवरात्रि के छठे दिन का महत्व – माँ कात्यायनी की आराधना शारदीय नवरात्रि का छठा दिन माँ दुर्गा के षष्ठम स्वरूप – माँ कात्यायनी की उपासना को समर्पित है। माँ कात्यायनी को महिषासुर का वध करने वाली योद्धा देवी के रूप में पूजा जाता है। वे धैर्य, साहस और विजय की प्रतीक हैं। 🌼 माँ कात्यायनी का स्वरूप इनके चार हाथ हैं – दाहिने ऊपर के हाथ में खड्ग (तलवार) , दाहिने नीचे के हाथ में कमल , बाएँ ऊपर के हाथ में ढाल , बाएँ नीचे का हाथ अभय मुद्रा में है। उनका वाहन सिंह है, जो पराक्रम और वीरता का प्रतीक है। उनका तेज़ अत्यंत प्रचंड और दिव्य है। 🙏 नवरात्रि क्यों मनाई जाती है? असुरों पर विजय – महिषासुर का संहार कर देवी ने धर्म की स्थापना की। आध्यात्मिक साधना – इन नौ दिनों में साधक अपने भीतर की शक्ति को जागृत करता है। ऋतु परिवर्तन का पर्व – शरद ऋतु में शरीर और मन को नई ऊर्जा से भरने ...