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एक मुलाकात

सुबह का समय था और सूरज की पहली किरणें खिड़की से छनकर आ रही थीं। रवि अपनी बालकनी में बैठा, चाय की चुस्की ले रहा था। शहर अभी पूरी तरह से जागा नहीं था, पर सड़कों पर हल्की हलचल शुरू हो चुकी थी। तभी उसकी नज़र सामने वाली बालकनी पर पड़ी।


एक बूढ़ी अम्मा बैठी हुई थीं। उनकी आँखों में एक अजीब-सी उदासी थी। रवि उन्हें अक्सर देखता था, पर कभी बात नहीं हुई। आज न जाने क्यों, उसका मन हुआ कि उनसे बात करे। उसने सोचा, "आज उनसे बात करके देखूँ।"


रवि ने धीरे से आवाज़ दी, "नमस्ते, अम्मा जी।"


अम्मा ने सिर उठाकर देखा। उनकी आँखों में पहले हैरानी और फिर एक हल्की-सी मुस्कान आई। "नमस्ते, बेटा।"


"अम्मा जी, आप यहाँ अकेली रहती हैं?" रवि ने पूछा।


"हाँ, बेटा। मेरा बेटा विदेश में रहता है और बहू भी वहीं है। मैं अकेली रहती हूँ। तुम भी यहीं रहते हो?" अम्मा ने जवाब दिया।


"हाँ, अम्मा जी, मैं भी यहीं रहता हूँ। मैं यहाँ नौकरी करता हूँ," रवि ने बताया।


अगले कुछ दिनों तक रवि और अम्मा के बीच रोज़ बातचीत होने लगी। वे एक-दूसरे को अपनी कहानियाँ सुनाते। अम्मा उसे अपने बचपन के किस्से सुनातीं, जब गाँव में सब मिलजुल कर रहते थे। रवि उन्हें अपने काम की बातें बताता और उन्हें हँसाने की कोशिश करता।


एक दिन रवि ने अम्मा से कहा, "अम्मा जी, आज मेरे साथ खाना खाइए।"


अम्मा की आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने कहा, "इतने सालों बाद किसी ने मुझे खाने पर बुलाया है।"


उस दिन रवि ने अम्मा के लिए गरमा-गरम पूरियाँ और सब्ज़ी बनाई। अम्मा ने खाना खाया और उनके चेहरे पर जो खुशी थी, वह रवि ने पहले कभी नहीं देखी थी। खाना खाते हुए अम्मा ने कहा, "तुमने मेरे बेटे की कमी पूरी कर दी, बेटा।"


उस दिन से रवि और अम्मा के बीच एक रिश्ता बन गया। रवि रोज़ शाम को अम्मा के पास जाता, उनके साथ बैठता और उनकी बातें सुनता। वे अब सिर्फ़ दो अलग-अलग लोग नहीं थे, बल्कि एक-दूसरे के परिवार का हिस्सा बन चुके थे।


एक शाम अम्मा ने रवि से कहा, "बेटा, ज़िन्दगी में रिश्तों की बहुत अहमियत होती है। पैसे और कामयाबी अपनी जगह हैं, पर जब हम अकेले होते हैं, तो यही रिश्ते काम आते हैं।"


रवि ने मुस्कुराते हुए अम्मा का हाथ पकड़ा और कहा, "अम्मा जी, आप ने मुझे यह सिखा दिया कि एक छोटा-सा प्रयास भी किसी की ज़िन्दगी में बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है।"


यह कहानी हमें सिखाती है कि हम अपने आसपास के लोगों से जुड़कर उन्हें और खुद को भी खुशी दे सकते हैं। एक छोटी-सी पहल से हम किसी के अकेलेपन को दूर कर सकते हैं और एक नया रिश्ता बना सकते हैं।


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