Skip to main content

असली ज़रूरत मंद

.......................................................................................................

"भाई साहेब ! ओ भाई साहेब ! सुनिए तो! बच्चा कई दिनों से भूखा है । कुछ मदद कर दीजिए ।"
आवाज़ अनसुनी कर रोहित चला जा रहा था । तभी उसके मन में पता नहीं क्या आया कि पीछे मुड़ के उस औरत के पास आ गया जो उसे आवाज़ लगा रही थी । यही कोई लगभग 45 वर्ष की आयु की औरत थी। रोहित को पास आते देख, महिला दयनीय चेहरा बना कर गिड़गिड़ाते हुए बोलने लगी।
"साहेब! पैसे नहीं तो राशन दिला दीजिए या 5 किलो आटा ही दिला दीजिए, बच्चे भूखे हैं " ।
"मैं आपको इसी जगह पे सालों से देखता हूँ। आपकी सेहत भी ठीक ठाक दिखती है, फिर आप ये रोज़ इतना भीख माँग कर करती क्या हैं ? मैंने भी बहुत बार आपको मदद की है । मुझे याद है।”
रोहित उस औरत को प्यार से समझाने के लहजे से बात करने लगा ।
"अरे नहीं साहेब मेरा बच्चा भूखा है, पैसे नहीं तो खाने का सामान दिला दीजिए। ” औरत एक बात की रट लगाए पड़ी थी।
“अच्छा तो पहले आप लोग पैसे माँगते थे, और लोग ज़रा समझदार हो गए हैं तो आप लोग बोलते हो कि 5 किलो का आटा दिला दीजिए। आपको सुबह से कम से कम 50 किलो आटा तो मिल ही गया होगा? कहाँ है सारा समान ?”
अब रोहित की आवाज़ में तनिक कठोरता आने लगी।
"आपको पता है हमें मदद करने में कोई दिक़्क़त नहीं है लेकिन समस्या ये है कि आप लोगों की वजह से जो बिलकुल ज़रूरत मंद हैं उनको मदद नहीं मिल पाती है ”
“ऐसा है भाई साहेब अगर आपको मदद करनी है तो करिए नहीं तो यहाँ से निकलते
बनिए, और ज़्यादा ज्ञान मत बाटिए यहाँ ।”
औरत भी अब अपनी आवाज़ तेज करने लगी। उसे लग गया कि ये आदमी कुछ मदद तो करेगा नहीं और उल्टा दूसरे ग्राहक को भी भड़का देगा।
कुछ देर तक बातों का युद्ध चलता रहा फिर रोहित अपने आपको कुछ और जनो से घिरा पाया । शायद ये लोग उस औरत के साथी थे।
भाई साहेब, अपने काम से मतलब रखो ना? जाओ यहाँ से, कुछ देना तो है नहीं और यहाँ का माहौल और ख़राब कर रहे हो। निकलो यहाँ से।” रोहित ने आवाज़ की तरफ़ मुड़ के देखा तो लगा यह आदमी इन लोगों से अलग है और ये इनका मालिक लग रहा है।
रोहित को समझ नहीं आ रहा था कि वह इन लोगों को कैसे समझाए? आख़िर ये कब तक ज़रूरत मंद का हक़ खाते रहेंगे। रोहित वहाँ का माहौल गरम होता देख वहाँ से चला गया। और उसकी तरफ़ से कोई था भी तो नहीं उसकी बातों का समर्थन करने के लिए?
फिर रोहित क़रीब रोज़ ही उस जगह पर किसी ना किसी औरत या आदमी को देखता जो अलग- अलग परेशानियाँ बता के राह चलते लोगों से मदद लेते थे।
उसका मन दुखी हो जाता कि ये मदद असल में जिनको चाहिए उनको नहीं मिल पाती।
-अरुण कुमार सिंह

Comments

Popular posts from this blog

🌸 नवरात्रि के छठे दिन का महत्व – माँ कात्यायनी की आराधना

 यहाँ नवरात्रि के छठे दिन (षष्ठी) के लिए संपूर्ण हिन्दी ब्लॉग सामग्री प्रस्तुत है। इसे आप अपने ब्लॉग, सोशल मीडिया पोस्ट या वीडियो स्क्रिप्ट में सीधे उपयोग कर सकते हैं: 🌸 नवरात्रि के छठे दिन का महत्व – माँ कात्यायनी की आराधना शारदीय नवरात्रि का छठा दिन माँ दुर्गा के षष्ठम स्वरूप – माँ कात्यायनी की उपासना को समर्पित है। माँ कात्यायनी को महिषासुर का वध करने वाली योद्धा देवी के रूप में पूजा जाता है। वे धैर्य, साहस और विजय की प्रतीक हैं। 🌼 माँ कात्यायनी का स्वरूप इनके चार हाथ हैं – दाहिने ऊपर के हाथ में खड्ग (तलवार) , दाहिने नीचे के हाथ में कमल , बाएँ ऊपर के हाथ में ढाल , बाएँ नीचे का हाथ अभय मुद्रा में है। उनका वाहन सिंह है, जो पराक्रम और वीरता का प्रतीक है। उनका तेज़ अत्यंत प्रचंड और दिव्य है। 🙏 नवरात्रि क्यों मनाई जाती है? असुरों पर विजय – महिषासुर का संहार कर देवी ने धर्म की स्थापना की। आध्यात्मिक साधना – इन नौ दिनों में साधक अपने भीतर की शक्ति को जागृत करता है। ऋतु परिवर्तन का पर्व – शरद ऋतु में शरीर और मन को नई ऊर्जा से भरने ...

जेठ की दोपहरी

                                                      *** जेठ की दोपहरी *** अरे सोमू भैया!!! बहुत सालों बाद गाँव आएँ! सब ठीक तो है? “तीन पहिया आटो से अपना सूट्केस ले कर गाँव से २ कोस दूर चौराहे पर उतर रहा था तभी पीछे से आवाज़ आयी” । सूट्केस सम्भालते हुए और चेहरे का पसीना पोछते हुए, पीछे मुड़कर के देखा तो जगु मोटरसाइकल से उतर कर सोमेश की तरफ़ आ रहा था। “गाँव में सोमेश को सभी लोग सोमू कहके बुलाते थे” अरे जगु तुम! हाँ, बहुत सालों बाद गाँव आया हूँ, स्कूल की गर्मी की छुट्टी चल रही है तो सोचा गाँव घूम आऊँ। तुम बताओ! कैसे हो भई? बहुत सालों बाद तुम्हें देखा है। “जगु २ साल सोमेश से छोटा था, गाँव में उसके घर के बग़ल में ही जगु का घर है, सोमेश जब साइकल से स्कूल जाता था तो कभी-कभी इसको भी स्कूल जाने के लिए पीछे कैरीअर पे बैठा लेटा था।” हम लोग ठीक हैं भैया, बस बाबूजी को बुख़ार है २ दिन से तो दवा की दुकान जा रहा हूँ दवा लाने। आप ...

प्यार एक अजीब सा एहसास है / Love is a strange feeling.

 प्यार एक अजीब सा एहसास है।  जिसको सब समझ नही सकते ।  केवल उसी को समझ में आता है जिसको प्यार होता है ।  कोई इस एहसास को बता भी नही सकता ।  इसको केवल महसूस किया जा सकता है ।  यह आपके जीवन में कई बदलाव ला सकता है।