हमें अपने संघर्षों, अपने कठिनायियों से डरने की जगह, एक-दूसरे के साथ मिलकर समाधान ढूंढने की आवश्यकता है।
समस्याओं का सामना करने के लिए, एक साथ मिलकर काम करना हमेशा सबसे बढ़िया होता है।
कोई भी बड़ा काम , बड़ी मुश्किल का सामना, साथ मिलकर करने से, बड़ा से बड़ा काम भी आसान हो जाता है।
जब हम अकेले किसी समस्या का समधन ढूंढने निकल पड़ते हैं तो समाधान तो मिलता हाई। लेकिन ये नहीं पता चलता कि ये समाधान सही है या ग़लत।
हमें अपना ढूँढा हुआ समाधान तो हमेशा से ही सही लगेगा। लेकिन ये तब सही होगा, जब कोई और उसे समझ के बताए कि ये सही है।
सफलता वह है जब हम अपने सपनों की खोज में उतरते हैं, और रास्ते में मिलने वाली हर कठिनायी को एक संगीन मानते हैं।
“पूरे हफ़्ते की स्कूल की छुट्टी हुई थी, ४ दिन घर बैठे - बैठे बीत गए, इससे अच्छा कहीं घूम ही आते है? क्या कहती हो?” बग़ल के सोफ़े में घुसे अपनी प्यारी पत्नी सुनैना से कुशल बोलते हुए किचन की तरफ़ चलता गया। सुनते ही सुनैना भी ख़ुशी में झूमती हुई बोली “ हाँ! बिल्कुल, सही कहते हैं, मैं भी यही सोंच रही थी।घर बैठे-बैठे बिलकुल ही बोर हो गए हैं! टेलिविज़न पर एक ही वेब सिरीज़ ४ बार देख चुकी हूँ। अब पंचवि बार देखने का मन नहीं है मेरा! कहाँ चले? कोई आस पास की जगह देखते हैं ,१ दिन का घूमने का हो तो कल सुबह निकल चलते हैं, वही रात में रुक भी जाएँगे।” कुशल ने सोचा कि ये तो बस इंतेज़ार ही कर रही थी, मेरे बोलते ही इसने सारा प्लान भी बना लिया! बग़ल के कमरे में इनका प्यारा बेटा राहुल, विडीओ गेम खेल रहा था, सुनते ही बाहर आ गया और वह भी सोफ़े में बैठ गया जहां बाहर जाने का प्लान बन रहा था। उनकी बात ध्यान से सुना और दोनो लोगों को हिदायत देते हुए बोला “बिलकुल नहीं!, कहीं नहीं जाना है, मेरी छुट्टी हुई है, आप लोगों की नहीं हुई है!, मुझे पूरे हप्ते घर पर ही रहना है, मैं रोज़ स्कूल जाता हूँ, जब छुट्टी हुई ह
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